रात के करीब 2 बजे अर्चित को अचानक महसूस हुआ कि कोई घर के दरवाज़े पर दस्तक दे रहा है. इस वक्त कौन हो सकता है, मुझे तो कोई यहां जानता भी नहीं...इसी बीच दरवाजे की वो दस्तक बरकरार थी. अर्चित भारी आंखों से दरवाजे की तरफ बढ़ा, उसने ठक से दरवाज़ा खोला मगर दरवाजे के उस पार कोई नहीं था...
 
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