अयान अपने कदमों को रोक न पाया और धीरे-धीरे उसी तरफ बढ़ने लगा. कुछ ही कदमों का फसला तय कर वो अपनी मरहूम दादी के कमरे के दरवाज़े पर जा पहुंचा. हो न हो, मगर उस कमरे की दहलीज़ किसी अजीब सी सर्द घेरे में थी, आखिर क्या था अंदर?... 
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