वो दोनों सावन की अधचांदनी रात में मिले थे। घटाओं के बरसने पर धुल आई धरती की सौंधी सी खुशबू अपनी आत्मा में उतार, इंद्रप्रस्थ बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार करते हुए. 9 बजे की लास्ट लोकल बस भी जा चुकी थी, उसे तो मतलब सिर्फ अपने घर जाने से था पर रवि उसे कभी स्टॉप पर अकेला छोड़ कर न जाता था... 
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