अपनी बाजू वाली डेस्क पर बैठी निशा को देखकर अमन के मन में मानो लड्डू फूटा करते थे। वह निशा को हंसते देखकर ऐसा खिल उठता था जैसे कोई गुलाब खिलता है। कच्ची उम्र का प्रेम ऐसा ही तो होता है। अमन और निशा बीएससी फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट थे।
Read more - Original news link
Be the first person to like this.
Similar news
Most viewed news
|
|
|
