राजन ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहा था कि तभी अचानक उसके फोन की घंटी बजती है. फोन की उस तरफ संजीव था. संजीव, राजन का जिगरी यार...दोनों अक्सर साथ में पार्टी किया करते थे, लेकिन राजन की पत्नी की मौत के बाद उनका पार्टी का यह सिलसिला लगभग बंद ही हो गया था.
आज अचानक से संजीव की कॉल देख, राजन थोड़ा चौंक उठा. इतने दिनों बाद इसे मेरी याद कैसे आई? यह सोचते हुए राजन ने कॉल उठाई. उस तरफ से संजीव ने हैलो! किया. राजन ने महसूस किया कि संजीव की आवाज थोड़ी दबी हुई है और उसके बोल लड़खड़ा रहे हैं, मानों वो बहुत डरा हुआ हो. जब राजन ने संजीव से पूछा कि क्या हुआ वो परेशान लग रहा है, इस पर संजीव ने जवाब दिया, 'भाई गजब हो गया, धीरज भी वैसे ही मरा, जैसे हमारे बाकी दोस्त'
बस इतना सुनते ही राजन के पांव के नीचे से जमीन खिसक गई. उसके चेहरे का रंग उड़ने लगा और जोर-जोर से रोने लगा.
आज अचानक से संजीव की कॉल देख, राजन थोड़ा चौंक उठा. इतने दिनों बाद इसे मेरी याद कैसे आई? यह सोचते हुए राजन ने कॉल उठाई. उस तरफ से संजीव ने हैलो! किया. राजन ने महसूस किया कि संजीव की आवाज थोड़ी दबी हुई है और उसके बोल लड़खड़ा रहे हैं, मानों वो बहुत डरा हुआ हो. जब राजन ने संजीव से पूछा कि क्या हुआ वो परेशान लग रहा है, इस पर संजीव ने जवाब दिया, 'भाई गजब हो गया, धीरज भी वैसे ही मरा, जैसे हमारे बाकी दोस्त'
बस इतना सुनते ही राजन के पांव के नीचे से जमीन खिसक गई. उसके चेहरे का रंग उड़ने लगा और जोर-जोर से रोने लगा.
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