Sunday, December 29, 2019 12:00 am - Sunday, February 2, 2020 10:00 am
उत्तराखंड या हिमाचल प्रदेश के अति गोपनीय सिद्ध पीठ पर / Uttrakhand or Himachal Pradesh (Rare Siddh peeth),

ॐ !! जय महाकाली माँ, जय महाकाल !! ॐ 
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मेरा एक विहंगम प्रश्न है सर्व प्रथम आपसे, आप मनुष्य रूप में क्यों जन्मे हो ? आपके कर्त्तव्य क्या है ? आपको जीवन के अंतिम क्षण में अगर कुछ चाहिए तो क्या चाहिए ? अगर यही सवाल मेरे से पूछा जाए तो .. राष्ट्र और धर्म निमित्त कार्य ही मेरे जन्म और कर्त्तव्य है और जीवन का अंतिम क्षण में मुझे सिर्फ यही चाहिए की मेरे इष्ट मुझे लेने स्वयं आये ! कुछ ऐसा कर चलो की आपको दुःख हो तो आपके देवता आपके दुःख में साथ हो, ऐसा अच्छा कार्य कर चलो की आपके देवी देवता, और आपके पित्तरो अर्थात पूर्वजो को आप पर गर्व हो ! देवी देवता आपको अपने में विलीन कर ले अर्थात आपको उनके चरणों में स्थान मिले !

वर्तमान समय में आपकी स्थिति क्या हो सकती है एक अनुमान लगा लेता हु, आप को सर्वप्रथम धन की तो कमी होगी ही, ज्ञात अज्ञात शत्रु भी होंगे जैसे रोग, गृह, नक्षत्र आदि विपरीत होंगे, आपकी शादी नहीं हो रही, हुई है तो पति या पत्नी से अनबन होगी, आपके बच्चे नहीं हो रहे, है तो आपके कहने में नहीं, या बुरी सांगत में आ गए, या चोरी करते है !

या आपको अपने मनपसंद प्रेमी से शादी करनी है पर घर वाले सपोर्ट में नहीं, आपको कर्ज हो गया है, आपके पैसे डूब गए या कोई ले कर भाग गया, आपको व्यवसाय में जबरदस्त घाटा हुआ, या होता ही जा रहा है, पैसे के लेनदार परेशां कर रहे है, बीमारी पीछा ही नहीं छोड़ रही, घर में कलह हो, आये दिन किसी न किसी से आपका झगड़ा हो रहा हो !

कारण चाहे जो भी हो, यदि आपको लगता है स्थितिया आपके पक्ष में नहीं है तो आपको कभी कभी आत्महत्या की इच्छा भी होती हो और ऐसा है की वास्तव में आप आत्महत्या की सोच रखते है तो यह हवन अनुष्ठान आपके लिए सर्वोच्च रूप से सहायक होगा .. अब आप पूछेंगे की कैसे होगा ये ? मैंने तो कुंडली भी दिखाई, जिस जिस पंडित / तांत्रिक ने जो बताया वो भी किया, पैसे व्यर्थ हुए, समय व्यर्थ हुआ और अब तो तंत्र /ज्योतिष पर से विश्वास उठ गया है .. तब आपको एक लाइन लिख कर दे रहा हु इस हवन अनुष्ठान में जरुर आये .. महाकाली माँ के आशीर्वाद से खाली हाथ नहीं जायेंगे ! अब आप पूछेंगे क्या गारंटी है तो मेरा प्रशन है आप अगले क्षण जीवित रहेंगे इसकी गारंटी दो तो आप नहीं दे सकते .. क्योकि आप स्वयं जानते है मैंने यहाँ सत्य लिखा है अगले क्षण की गारंटी नहीं ...!

आपको राष्ट्र और धर्म निमित्त आह्वान दिया जा रहा है, इस हवन अनुष्ठान में भाग लेने के लिए ! अब आप पूछेंगे मुझे क्या फायदा है ? तो मेरा जवाब है आप घर पर ही बैठिये .. आप आये नहीं ! क्योकि यदि आप लालच ले कर आये तो आपका कार्य सिद्ध होगा ही, इसकी कोई गारंटी नहीं ! लेकिन यदि आप सर्वजन हिताय, राष्ट्र हिताय, धर्म हिताय की भावना से आये तो ये भावना ही प्रचंड वेग से कार्य करेगी, अर्थात धर्म और राष्ट्र दोनों के निमित्त आपके द्वारा प्रदान की गई हर एक आहुति का अपना महत्त्व हो जायेगा, तब राष्ट्र और धर्म को आपके कर्म से फायदा हुआ तो आपके इष्ट देवी देवता एवं पित्तर देव आपको कितना आशीर्वाद देंगे, यह लिखने की मेरी क्षमता नहीं, लेकिन आपके पूर्वजो का सर गर्व से ऊँचा हुआ तो ऊपर लिखी समस्त समस्याए स्वतः आपको छोड़ कर चली जाएगी, इसलिए कुल देवी देवता और पित्तर के साथ आपके इष्ट को भी बल मिले आपके सद्कार्य से, तत्काल आपकी आवाज आपके दर्द को वो समझे और इससे आपको मुक्ति मिले यही भाव कह सकते है की फायदा होगा ! बस लालच करके मत आना, यही निवेदन है !

अब आप पूछेंगे की इस अनुष्ठान /हवन से राष्ट्र और धर्म को कैसे फायदा होगा ?, तो इसका जवाब सीधा है, राष्ट्र है तो धर्म है, धर्म है तो राष्ट्र है !

आपके द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रतिदिन की आहुति से एक माह में डेढ़ लाख हो जाती है और एक सो आठ लोग ही इस हवन अनुष्ठान में बैठने वाले है इससे एक भी ज्यादा नहीं नहीं बैठेंगे .. तो हम सभी की आहुतियो से एक माह में एक करोड़ बासठ लाख आहुतिया प्रदान की जाने वाली है .. अगर आप धर्म प्रेमी है तो आपको पता है मंत्र जाप में सवा लाख पर क्या होता है, सवा पाच लाख पर क्या प्रभाव है और फिर ग्यारह लाख पर और आगे इक्कीस लाख और इक्यावन लाख के बस सवा करोड़ मंत्र जाप पर क्या प्रभाव होगा .. तो यहाँ लिखने की आवश्यकता नहीं !

परन्तु आप यहाँ ध्यान दीजिये की आप यहाँ एक अति गोपनीय सिद्ध पीठ पर, जो स्वतः सिद्ध है, अभी बोलने की आवश्यकता नहीं, कहा होगा ?, वहा पर हम अति उग्र, प्रचंड वेग से युक्त देवी देवताओं का आह्वान आहुति के माध्यम से करने जा रहे है, अर्थात कुछ के नाम लिख देता हु, विष्णु जी नरसिंह रूप में उग्र है, भैरव जी उग्र स्वरुप में है, हनुमान जी उग्र स्वरुप में है, गणपति जी उग्र स्वरुप में है, शिव जी उग्र स्वरुप में है, महाविद्याये भी अति उग्र रूप में है .. तो हम यहाँ पर कम से कम एक ही मंत्र में इन इक्कीस शक्तियों का आह्वान करेंगे और निवेदन करेंगे की हमारी व्यक्तिगत, कुल, पूर्वजो की समस्त ज्ञात अज्ञात गलतियों को अर्थात बुरे कर्मो को अपनी उग्रता से काटने का कष्ट करते हुए वर्तमान समय में पृथ्वी पर रह रहे समस्त सनातन धर्म विरोधी राष्ट्र विरोधी शक्तियों का यथा सेक्युलर, गद्दार, विधर्मी का वे अपने उग्र स्वरुप में सत्यानाश करे, और हमारे इस यज्ञ का फल राष्ट्र हिताय और धर्म हिताय है अतः धर्म और राष्ट्र रक्षा के कार्य में हमें सहयोगी हो !

आपमें से कुछ जानकार कहेंगे की इसके लिए इतनी अधिक उग्र शक्तियों का आह्वान क्यों ? तो इसका जवाब सिर्फ इतना ही है .. उग्र शक्तियों के बीजाक्षर मन्त्र से हम वर्तमान समय में बिज बो रहे है, कल को ये अंकुरित होंगे, पौधे बनेंगे, पेड़ बनेंगे और फिर समय पर फल देंगे, तो ये हवन अनुष्ठान अति तीव्र प्रचंड वेग से युक्त है तो परिणाम तो तेजी से मिलेंगे ही, हमारे कर्म दंड इतने प्रबल होंगे की हम लाख कोशिश करे तो भी इस तरह के अनुष्ठान में आप आसानी से भाग ले पाए तो इसे सौभाग्य समझे ! पिछले आठ वर्ष से कोशिश कर रहा हु की ये हो जाये .. लोग आने को तैयार होते है लेकिन उनके कर्म दंड खड़े हो जाते है .. वो अपने आप में उलझ जाते है और कार्यक्रम आगे बढ़ जाता है !

आप प्रश्न लिखिए .. मैं पोस्ट के माध्यम से जवाब दूंगा !

इस अनुष्ठान में भाग लेने के लिए कठोर नियम है, इसलिए वीरो का स्वागत है, ज्ञानियों का स्वागत है, अघोरियो का स्वागत है, तंत्र सिद्धो का स्वागत है, नाथ संप्रदाय ज्ञानियों का स्वागत है ... आओ रण भूमि में, एक रण विधर्मियो के निमित हो जाये !

ॐ !! जय महाकाली जय महाकाल !! ॐ शं

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